PKVY Yojana: केंद्र सरकार ने जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए परंपरागत कृषि विकास योजना (PKVY) 2025-26 को फिर से प्रभावी किया है, जिसके तहत किसानों को तीन साल में प्रति हेक्टेयर कुल ₹31,500 की आर्थिक सहायता दी जाएगी। इस योजना का मकसद रासायनिक खेती पर खर्च कम करना और किसानों को ऑर्गेनिक मॉडल अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है, ताकि मिट्टी की सेहत सुधरे और आमदनी बढ़े।
सीधे खाते में मिलेगी सब्सिडी का पैसा
PKVY योजना की सबसे खास बात यह है कि इसमें मिलने वाली सहायता राशि सीधे DBT के जरिए किसानों के बैंक खाते में भेजी जाती है। बीज, जैविक खाद, कम्पोस्ट, प्रशिक्षण और मार्केटिंग जैसे जरूरी खर्चों के लिए यह फंड दिया जाता है, जिससे बिचौलियों की कोई भूमिका नहीं रहती और किसानों को समय पर पूरा लाभ मिलता है।
सब्सिडी की राशि कैसे मिलेगी
योजना के अनुसार तीन साल में प्रति हेक्टेयर ₹31,500 की सहायता दी जाती है, जिसमें जैविक इनपुट और बीज के लिए ₹15,000, प्रशिक्षण व क्षमता विकास के लिए ₹9,000, विपणन और मूल्य संवर्धन के लिए ₹4,500 और प्रमाणन व लैब टेस्टिंग के लिए ₹3,000 शामिल हैं। यह सहायता किसानों को जैविक खेती की पूरी प्रक्रिया अपनाने में मजबूत आधार देती है।
PKVY Yojana क्या है और क्यों जरूरी है
PKVY योजना की शुरुआत 2015-16 में की गई थी, ताकि रासायनिक खाद और कीटनाशकों के अधिक उपयोग से हो रहे नुकसान को कम किया जा सके। इस योजना का उद्देश्य प्राकृतिक तरीकों से खेती को बढ़ावा देना है, जिससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहे और फसलों की गुणवत्ता बेहतर हो। सरकार लंबे समय से किसानों की आय बढ़ाने के लिए इस तरह की योजनाओं पर जोर दे रही है।
योजना के मुख्य उद्देश्य
इस योजना के तहत किसानों को ऑर्गेनिक खेती के लिए आर्थिक सहायता देना, खेतों में रासायनिक इनपुट की जगह जैविक विकल्पों का उपयोग बढ़ाना और मिट्टी की सेहत सुधारकर फसल का बेहतर बाजार मूल्य दिलाना प्रमुख लक्ष्य हैं।
किन किसानों को मिलेगा लाभ
PKVY योजना का लाभ लघु और सीमांत किसान, महिला किसान, स्वयं सहायता समूह, किसान समूह और सहकारी समितियां ले सकती हैं। आवेदन केवल क्लस्टर के रूप में स्वीकार किया जाता है, यानी कम से कम 20 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए किसानों का समूह बनाना जरूरी होता है।
सब्सिडी का सही उपयोग कैसे करें
योजना से जुड़ चुके किसानों के अनुभव बताते हैं कि इस फंड से जैविक खाद, वर्मी कम्पोस्ट, मिट्टी परीक्षण, प्रशिक्षण, पैकिंग और मार्केटिंग जैसे काम आसानी से किए जा सकते हैं, जिससे खेती की लागत घटती है और मुनाफा बढ़ता है।
ऑर्गेनिक खेती से बढ़ेगी कमाई
एक बार फसल का ऑर्गेनिक प्रमाणन हो जाने के बाद किसान अपने उत्पाद ऊंचे दामों पर बेच सकते हैं। कई राज्यों में जैविक मंडियों में ऑर्गेनिक अनाज, सब्जियों और फलों को प्रीमियम रेट मिलता है, जिससे किसानों की आय में अच्छा इजाफा होता है।
PKVY योजना में आवेदन कैसे करें
आवेदन के लिए सबसे पहले गांव या क्षेत्र में किसानों का क्लस्टर बनाना होता है, फिर राज्य कृषि विभाग, नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र या PGS-India पोर्टल के माध्यम से आवेदन किया जा सकता है। भूमि के कागजात, आधार कार्ड, बैंक विवरण और क्लस्टर से जुड़ाव का प्रमाण जरूरी होता है।
क्लस्टर क्या होता है और क्यों जरूरी है
क्लस्टर का मतलब किसानों का ऐसा समूह है जो मिलकर एक ही क्षेत्र में जैविक खेती करता है। इससे लागत कम होती है, प्रशिक्षण और सब्सिडी जल्दी मिलती है और सामूहिक उत्पादन के कारण बाजार में बेहतर कीमत मिलती है। PKVY योजना 2025-26 उन किसानों के लिए बेहतरीन मौका है जो खेती में बदलाव कर कम लागत में ज्यादा मुनाफा चाहते हैं।