Cooking Oil Price Drop: लगातार बढ़ती महंगाई के बीच अब आम लोगों के लिए राहत की खबर आई है, क्योंकि नए GST नियम लागू होते ही रसोई तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। Cooking Oil Price Drop का असर सीधे घरेलू बजट पर पड़ा है और पिछले कुछ महीनों से महंगे तेल के कारण परेशान परिवारों को अब कुछ सुकून मिला है। सरकार के फैसलों और बाजार में सप्लाई बेहतर होने से तेल के दाम नीचे आए हैं।
GST बदलाव का बाजार पर असर
खाद्य तेलों पर लागू जीएसटी नियमों में किए गए बदलाव के बाद टैक्स का बोझ कम हुआ है, जिससे उत्पादन और वितरण की लागत घट गई। इसी का फायदा उपभोक्ताओं को मिला और कंपनियों ने नए, कम दाम जारी किए। सप्लाई चेन में सुधार होने से यह राहत बिना देरी के बाजार तक पहुंच गई।
कौन-कौन से तेल सस्ते हुए
Cooking Oil Price Drop 2025 का असर लगभग सभी प्रमुख खाद्य तेलों पर देखने को मिल रहा है। अलग-अलग शहरों और राज्यों में रेट थोड़े अलग हो सकते हैं, लेकिन कुल मिलाकर ज्यादातर तेल पहले से सस्ते हो गए हैं।
रिफाइंड तेल के दाम में अच्छी कमी
शहरी इलाकों में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला रिफाइंड तेल अब 10 से 18 रुपये प्रति लीटर तक सस्ता मिल रहा है। इसका फायदा घरों के साथ-साथ होटल, ढाबों और छोटे कारोबारियों को भी हो रहा है।
सरसों तेल भी हुआ जेब पर हल्का
उत्तर भारत में रोजाना इस्तेमाल होने वाला सरसों तेल अब पहले से 6 से 12 रुपये प्रति लीटर तक सस्ता हो गया है। इससे शहरों के साथ ग्रामीण इलाकों के परिवारों को भी सीधा फायदा मिला है।
अन्य खाद्य तेलों के घटे रेट
सोयाबीन, सूरजमुखी, राइस ब्रान और पाम ऑयल जैसी किस्मों में भी कीमतों में नरमी आई है। बाजार में ब्रांड्स के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण ग्राहकों को अब बेहतर दाम पर तेल मिल रहा है।
1 लीटर तेल की अनुमानित नई कीमत
सूरजमुखी तेल की कीमत अब करीब 115 से 135 रुपये प्रति लीटर के बीच है, सोयाबीन तेल 110 से 125 रुपये प्रति लीटर के आसपास मिल रहा है, सरसों तेल 130 से 150 रुपये प्रति लीटर की रेंज में उपलब्ध है, राइस ब्रान तेल 120 से 135 रुपये प्रति लीटर तक बिक रहा है, जबकि पाम ऑयल सबसे सस्ता विकल्प बनकर 95 से 110 रुपये प्रति लीटर के बीच मिल रहा है।
आम परिवार को कितनी राहत
रसोई तेल सस्ता होने से घर के खर्च पर सीधा असर पड़ता है, क्योंकि एक सामान्य परिवार महीने में 3 से 5 लीटर तेल इस्तेमाल करता है। अगर प्रति लीटर 10 से 15 रुपये की बचत होती है, तो महीने में करीब 50 से 75 रुपये और साल भर में 600 से 900 रुपये तक की राहत मिल सकती है, जो बढ़ती महंगाई के दौर में बड़ी मदद साबित होगी।